कुछ ठहर सा गया है सब यहाँ
सूरज अलसाया सा किसी hangover में डूबा सा चला आता है
जैसे किसी ने alarm लगा कर ज़बरदस्ती जगाया हो
दिन भर लडखडाती चालें चलता इंतज़ार करता है
की कब पांच बजे और छुट्टी हो
नाईट ड्यूटी पर चाँद भी बेमन सा
पिछले साल की फटी पुरानी चांदनी ओढ़े
चला तो आता है
औपचारिकता निभाने
contract था
संदेसे एक दुसरे को पहुँचाने का
पर वो भी बहुत छुट्टियाँ लेने लगा है आजकल
काम जो नहीं है उसके पास अब कुछ
रोज़ कोई नया बहाना न आने का बना लेता है
बस एक धुंध रहती है अब यहाँ
नयी नयी नौकरी पर लगी है
काम अपना बखूबी करती है