अक्सर ऐसा भी होता है
जब वही सब कुछ होता है
रोज़ होता है
वही शक्लें होती हैं वही बातें
वही हार जीत, वही सही गलत के लफड़े
वही वक़्त
वही सुबह, दोपहर, शाम
सूरज भी बड़ा punctual है
चाँद सितारे भी कम नहीं
अपने वक़्त पर हाजिरी लगाने सब चले आते हैं
तब मेरी एक दुनिया होती है
वो उलटी पुलटी दुनिया मेरी
वहां अक्सर रात को चाँद की गली में सूरज टहलते दिखता है
थक जाता है जब तो चाँद से बहती नदी में पैर डुबोये
तारों को घंटों तैरते देखता है
बादल कहीं दो पहाड़ों के बीच बैठा खिलखिलाता है जब
बारिश होने लगती है
पेड़ों पर शेर उंघते हैं
और पंछी पहरा देते हैं
रात की रानी सुबह खिलती है
रात को सूरजमुखी अंगड़ाई भरता है
मंदिर से आजान सुनायी पड़ता है
मस्जिद में घंटियाँ बजती हैं
मोहोम्मद रावन को मारता है
राम सूली पर लटका दिखता है
हाँ कई बार ऐसा भी होता है
वो उलटी पुलटी दुनिया मेरी ...
जब वही सब कुछ होता है
रोज़ होता है
वही शक्लें होती हैं वही बातें
वही हार जीत, वही सही गलत के लफड़े
वही वक़्त
वही सुबह, दोपहर, शाम
सूरज भी बड़ा punctual है
चाँद सितारे भी कम नहीं
अपने वक़्त पर हाजिरी लगाने सब चले आते हैं
तब मेरी एक दुनिया होती है
वो उलटी पुलटी दुनिया मेरी
वहां अक्सर रात को चाँद की गली में सूरज टहलते दिखता है
थक जाता है जब तो चाँद से बहती नदी में पैर डुबोये
तारों को घंटों तैरते देखता है
बादल कहीं दो पहाड़ों के बीच बैठा खिलखिलाता है जब
बारिश होने लगती है
पेड़ों पर शेर उंघते हैं
और पंछी पहरा देते हैं
रात की रानी सुबह खिलती है
रात को सूरजमुखी अंगड़ाई भरता है
मंदिर से आजान सुनायी पड़ता है
मस्जिद में घंटियाँ बजती हैं
मोहोम्मद रावन को मारता है
राम सूली पर लटका दिखता है
हाँ कई बार ऐसा भी होता है
वो उलटी पुलटी दुनिया मेरी ...