Thursday, October 18, 2012

पौना साल ...

बसंत के फूल चुने थे साथ 

सावन की झड़ी ने साथ भिगोया था

गर्मियों की लू के थपेड़ों से

एक दूसरे को अपने आँचल में छिपाया था

अब सर्दियों की रातों में

बस ख़्याल बचे हैं

तुम उन्हें सेकना वहां 

मैं इन्हें यहाँ सेकूंगी 


हाय कि 

प्यार का ये साल हमारा पूरा न हुआ ....

1 comment:

  1. last me "Haaye ke" ne jaan daal di.. beautyyyyyfullllll .... Keep writing :)

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