Insearch of myself
Tuesday, February 8, 2011
यूँही
रोज़ कुछ लिखने को नहीं होता था ..आज जब था तो शब्द बेमानी कर रहे थे ..डायरी का पन्ना अब भी मुझे देख रहा था ..कह रहा था मुझ पर कुछ लिखो.. पर मैंने भी इससे कह दिया ..." जा आज तू सादा ही रहेगा..तेरी यही सज़ा है".........
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