एक अरसे बाद खुद से मिले .. ..देख कर मुस्कुरा दिया। पुछा, ' कहो, आ गए सैर करके?' बहुत वक़्त लगा दिया? कैसा रहा सफ़र?' उसे देखा,,,पथराई सी आँखें हमारी आँखों में जैसे कुछ टटोल रही थीं ..उसकी खामोश नज़र पूछ रहीं थीं जैसे,,'क्या खोया? क्या पाया? फिर नज़रें मिला कर बोला 'छोडो जाने दो .. क्या करना हिसाब किताब ...ये बताओ खुश तो हो?' हमने भी धीरे से हामी भर दी ...फिर वो हाथ पकड़ कर बोला ..' मैं याद हूँ?' हम कुछ शर्मसार से हो गए ...याद तो था,,पर डर था कहीं पहचानने की बात पर ज्यादा सवाल जवाब किये तो बड़ा मुश्किल हो जायेगा ...जल्दी लौटेंगें कहकर इतने लम्बे अरसे तक गायब जो हो गए थे,,
और फिर उसने पढ़ लिया,,सारा मन आँखों से एक ही नज़र में उतार लिया,,बोला, ' आओ बस गल लग जाओ ..सब गिले शिकवे ख़तम,,'. अपने सीने से लगाया ....और हम दोनों रो पड़े .. ...
:)... Keep writing
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